June 17, 2021

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गरीबी को मात देकर अशोक बने अव्वल दर्जे के सैंड आर्टिस्ट, RK श्रीवास्तव ने बताया बिहार का गौरव

गरीबी को मात देकर अशोक बने अव्वल दर्जे के सैंड आर्टिस्ट, RK श्रीवास्तव ने बताया बिहार का गौरव

पटना। बिहार के छपरा जिले के एक कलाकार रेत पर कलाकृति उकेर रहे हैं, जिनकी प्रतिभा को पूरा देश सलाम कर रहा है। गूगल बॉय कैटिल्य पंडित के गुरु आरके श्रीवास्तव ने सैंड आर्टिस्ट अशोक के प्रतिभा को सलाम किया है. मशहूर शिक्षक आरके श्रीवास्तव ने बताया कि आज अशोक से फ़ोन पर बातचीत हुई। उनके द्वारा किया जा रहा कार्य समाज को नयी दिशा दे रहे है। हमें अशोक पर गर्व है।

नेवाजी टोला धर्मशाला छपरा बिहार के रहने वाले श्री बबन महतो के पुत्र अशोक को बचपन से ही आर्ट का शौक था, आरके श्रीवास्तव ने बताया की बातचीत के दौरान अशोक ने बताया की साइन बोर्ड पेन्टिंग से कैरियर शुरू किया था और उसी समय से लगातार कड़ी मेहनत से आर्ट को सीखते गए और सबसे बड़ी बात उन्होने बताया की खास तरीका भी है पेंटिंग बनाने का तरीका विकसीत किया जो बिना ब्रश के ही पेन्टिंग बनाते हैं ‘बॉडी प्रिंट आर्ट’ और इनकी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगभग भारत के सभी शहरों में लग चुकी है और बताते चलें की ये एक सफल गोताखोर भी हैं, इन्होंने पानी में डूबते हुए लगभग चार सौ से भी अधिक लोगों को बचाया है। और पूरे सारण में कोई भी डूब जाता है तो ये ही पानी में डुबकी लगाकर डूबे हुए व्यक्ति को निकालते हैं।ये प्रशिक्षित गोताखोर हैं।

ये सैंड आर्टिस्ट हैं, बचपन से बालू से खेलते खेलते और छपरा में ही अपने गुरू मेहदी शॉ जी से कला की बारीकियों को सीखा।ये समय समय पर समाज में घटित घटनाओं पर आधारित अपने सैंड आर्ट से मैसेज देने की कोशिश करते हैं। महापुरुषों का जन्म हो या श्रधांजलि अर्पित करना हो अपने सैंड आर्ट के जरिए दर्शाने की बखूबी कोशिश करते हैं।

देश में मार्च से शुरू हुआ लॉकडाउन किसी के लिए अच्छा रहा तो किसी के लिए बहुत ही बुरा, मध्यम वर्ग के कलाकारों की बात करें तो संकट के इस समय में उनके आय का स्रोत न के बराबर था, पर समझदार वही है जो अपने समय का सदुपयोग करे। आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही कलाकार की है, चेहरे पर गजब का आत्म विश्वास लंबे-लंबे बाल कला को अपनी ज़िंदगी मानने वाले।

एक गरीब परिवार में जन्में सैण्ड आर्टिस्ट अशोक कुमार बिहार के छोटे से शहर छपरा (Chhapra) के रहने वाले हैं। अशोक कला के काफ़ी धनी व्यक्ति है। सैंड आर्ट के साथ-साथ पेंटिंग और गोताखोरी में भी निपुण हैं। रंगों के माध्यम से बहुत ही बेहतरीन चित्र बनाते हैं। बच्चों को पेंटिंग सिखाने के लिए ‘कला पंक्ति’ नाम से कोचिंग संस्थान भी चलाते हैं। अपने दो विद्यार्थी पंकज और पवन को यह अपना दाहिना और बाया हाथ मानते हैं। हर साल अपने विद्यार्थियों को पेंटिंग प्रदर्शनी लगाने में भी मदद करते है। इसके अलावा समाजसेवा में भी प्रतिदिन अपना कुछ समय देते हैं।