September 23, 2021

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इन 11 अद्भुत बिहारी टैलेंट ने जीता सबका दिल, बेहतर कार्यों से बने लाखों युवाओं के रोल मॉडल…

पटना। कुछ लोग ऐसा काम करते हैं कि वे न केवल अपना नाम करते हैं बल्कि परिवार समाज के साथ-साथ देश और राज्य का नाम भी ऊंचा करते हैं। इसी तरह बिहार के 11 होनहार लोग हैं जो बिहार की कोख से पले-बढ़े हैं और लाखों युवाओं के आदर्श बने हैं।

सुशील कुमार
बिहार के रहने वाले सुशील ने साल 2011 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में हिस्सा लिया था. सुशील शो में 5 करोड़ जीतने की वजह से लंबे समय तक सुर्खियों में बने रहे.

सत्यम कुमार
सत्यम ने बिहार के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया है. इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना बहुत बड़ी बात है। महज 12 साल की उम्र में दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली IIT JEE को क्रैक कर पूरी दुनिया में तहलका मचाने वाला बिहार का सत्यम पिछले साल फ्रांस में भी इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए मिसाल बन गया था. 12 साल की छोटी सी उम्र में आईआईटी के ऊंचे किले पर फतह करने वाले सत्यम फ्रांस में इंजीनियरिंग के छात्र भी रह चुके हैं। सत्यम ने अपनी बुद्धि के कायल फ्रांसीसी छात्रों को भारतीय शिक्षा प्रणाली के गुर सिखाए हैं। भोजपुर जिले के बधरा प्रखंड के बखोरापुर निवासी रामलाल सिंह के पौत्र सत्यम कुमार ने भारत में काफी नाम कमाया था. जब महज बारह साल की उम्र में IIT की प्रतियोगिता में बवाल हो गया था। सत्यम ने फिलहाल आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल ब्रांच में बीटेक किया है। वर्तमान में सत्यम (ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय) से पीएचडी कर रहा है।

तुलसी अवतार तथागत
तथागत अवतार तुलसी जिसने महज 9 साल की उम्र में मैट्रिकुलेशन, 11 साल की उम्र में ही बीएससी और 12 साल की उम्र में एमएससी की डिग्री हासिल कर इतिहास रच दिया था। मात्र 22 साल की उम्र में ही आईआईटी, मुंबई में उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर बनने बनने का गौरव हासिल हुआ था। तुलसी आईआईटी के सबसे युवा प्रोफेसर माने जाते है। डा. तथागत अवतार तुलसी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से पीएचडी कर भारत के सबसे युवा पीएचडी होल्डर और सबसे कम पेज का (मात्र 33 पेज) पीएचडी थेसिस लिखने का रिकार्ड भी बनाया था। तथागत की उपलब्धियों पर ही 2002 में आई हॉलीवुड फिल्म ए ब्यूटीफुल माइंड प्रेरित थी। इस फिल्म को चार ऑस्कर पुरस्कार भी मिले थे। तथागत ने कहा कि आईआईटी, पटना ने मेरे ऑफर को ठुकरा दिया था। तुलसी को कनाडा की वाटरलू यूनिवर्सिटी ने भी अच्छे खासे पैकेज पर अपने यहां प्रोफेसर बनने का ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया था क्योंकि वह देश में रहकर ही काम करना चाहते थे।उन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस भोपाल ने भी नौकरी की पेशकश की थी। 2003 में उन्हें टाइम पत्रिका ने विश्व के सात सर्वाधिक चमत्कारिक युवाओं की लिस्ट में शामिल किया था।

सुपर 30 वाले अभयानंद और आनंद कुमार
अभयानंद और आनंद कुमार ने शिक्षा में ऐसी लकीर खींच दी जिससे आज पूरी दुनिया उन्हें सलाम कर रहा। एक पर बनी फिल्म परीक्षा तो दूसरे पर सुपर 30. अभयानंद बताते हैं कि उनके अभयानंद, रहमानी, मगध सुपर थर्टी और देश के बाहर सीएसआर के तहत चल रहे संस्थानों से 2000 से अधिक स्टूडेंट्स ने आइआइटी क्रैक किया है। वह कहते हैं कि मेरी यह धारणा बन रही है कि अब हर समाज के लोग यह कोशिश कर रहे हैं बच्चे पढ़ें। उन्हें यह समझ में आ गया है कि यह सरकार के बूते की बात नहीं। समाज की मदद से ही आंकड़ा बढ़ रहा है। यह अच्छा है।

मैथली ठाकुर
बिहार की मैथिली ठाकुर आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। फेसबुक पर 1 करोड़ से अधिक, यू ट्यूब पर 60 लाख और इंस्टाग्राम पर 26 लाख से अधिक लोग जिस 20 साल की लड़की को फॉलो करते हैं, निश्चित तौर पर वह असाधारण ही होगी। गांव-घर के गीतों से यह मुकाम हासिल करने वाली मैथिली ठाकुर के गीतों की गूंज अब देश के कोने-कोने से होती हुई सरहदों की रेखाएं भी पार कर गई है। मैथिली का प्यारा सा हंसमुख चेहरा हर किसी को आकर्षित करता है।

‘ब्लड मैन’ मुकेश हिसारिया
पटना के मुकेश हिसारिया को अब लोग ‘ब्लड मैन’ के नाम से जानते हैं। 50 हजार से अधिक लोगों को खून उपलब्ध कराकर उनकी जान बचा चुके मुकेश के काम से अमिताभ, शाहरुख और कपिल जैसी शख्सियत भी प्रभावित हैं। रक्तदान का इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा करने के संकल्प की भी अलग कहानी है।

मुकेश की मां की हालत खराब थी, पटना के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। वह उन्हें लेकर वेल्लोर गए। डॉक्टर ऑपरेशन को तैयार हुए, लेकिन जान बचाने की गारंटी नहीं थी। मुकेश ने हॉस्पिटल में संकल्प लिया कि मां की जान बच गई तो एक यूनिट खून दान करेंगे। मां की जान बची, बेटे ने रक्तदान किया। डेढ़ माह तक मां हॉस्पिटल में रही। बेटा हर दिन लोगों को मोटिवेट कर गरीब मरीजों को खून दिलाता रहा। बेटे का यही संकल्प उसे आज इस मुकाम तक पहुंचा दिया।

‘पैड वुमेन’ अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा
हमारे समाज में पीरियड्स से जुड़े जितने मिथक हैं, उतनी ही लापरवाहियां भी। मासिक धर्म के दौरान महिलाएं रसोई में नहीं जा सकतीं, मंदिर में नहीं जा सकतीं, पूजा नहीं कर सकती, यहां तक कि दूसरों के साथ बैठ भी नहीं सकती। लापरवाहियों की बात करें तो जागरुकता के अभाव में गांव में महिलाएं कपड़ा, राख और पत्तों का इस्तेमाल अपनी जान जोखिम में डाल देती हैं। आज तेजी से बढ़ता बच्चेदानी का कैंसर इसी का परिणाम है। बिहार की दो महिलाएं अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा ने पीरियड्स को शर्म नहीं, गर्व का सिंबल बनाया। किशोरियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं के बीच जागरुकता मुहिम चलाई। इसी का परिणाम है कि आज बिहार के 20 जिलों में उनके प्रयास से संचालित मोबाइल पैड बैंक ने युगांतकारी परिवर्तन लाया है।

बिगबॉस फेम दीपक ठाकुर हैं असली हीरो
देश-विदेश में अपनी प्रतिभा से बिहार का नाम रोशन करने वाले बॉलीवुड सिंगर दीपक ठाकुर असली हीरो हैं. बिगबॉस फेम दीपक ठाकुर ने अपने गांव और आसपास आए बाढ़ पीड़ितों की मदद काबिले तारीफ है. हर कोई सेलिब्रिटी दीपक ठाकुर जैसा नहीं होता। ऐसा इसलिए है, क्योंकि बिहार के कई हीरो और सेलेब्रिटीज हैं जो मुसीबत में अपना गांव छोड़कर मुंबई का रुख अपना लेते हैं. लेकिन, दीपक ठाकुर ने ऐसा बिल्कुल नहीं किया, क्योंकि सरकार अंधी हो सकती है. लेकिन, गांव का बेटा अंधा नहीं हो सकता, इस दीपक ठाकुर ने बाढ़ पीड़ितों की मदद करके यह दिखाया है.

आरके श्रीवास्तव
केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर से इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले छात्रों के बीच 1 रुपये में पढ़ाने वाले शिक्षक का जाना-पहचाना नाम है।

एक रुपये में पढ़ाते हैं आरके श्रीवास्तव, इंजीनियरों ने बनाया 540 गरीब छात्र
बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले आरके श्रीवास्तव देश में गणित गुरु के नाम से मशहूर हैं. नाटक के माध्यम से गणित को जादुई तरीके से पढ़ाने का उनका तरीका अद्भुत है। जंक जुगाड़ से प्रैक्टिकल करके गणित पढ़ाएं। उन्होंने आर्थिक रूप से गरीब सैकड़ों छात्रों को IIT, NIT, BCECE सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में ले जाकर अपने सपने को पंख दिए हैं।

उनके द्वारा चलाया जा रहा नाइट क्लासेस अभियान अद्भुत, अकल्पनीय है। छात्रों को स्वाध्याय के प्रति जागरूक करने के लिए 450 से अधिक कक्षाओं ने रात भर लगातार 12 घंटे तक गणित पढ़ाया है। दूसरे राज्यों के शिक्षण संस्थान भी उन्हें यहां अपनी शिक्षा देने के लिए गेस्ट फैकल्टी कहते हैं। उनके अकादमिक कार्यों की खबरें देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई हैं, उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है, देश उन्हें विश्व प्रसिद्ध गूगल बॉय कौटिल्य के गुरु के रूप में भी जानता है।

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