July 28, 2021

My UP News

My UP NEWS

कुर्बानी हलाल पैसे से ही जायज: कारी अनस

गोरखपुर-DVNA। शाही जामा मस्जिद, तकिया कवलदह में कुर्बानी के मसाइल पर दर्स हुआ। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। नात-ए-पाक पेश हुई।
मुख्य वक्ता कारी मो. अनस रजवी ने कहा कि कुर्बानी का सिलसिला ईद-उल-अजहा के दिन को मिलाकर तीन दिनों तक चलता है। मुसलमान अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करता है। हलाल तरीके से कमाये हुए पैसे से कुर्बानी जायज मानी जाती है, हराम की कमाई से नहीं। अल्लाह कुरआन-ए-पाक में इरशाद फरमाता है कि ऐ महबूब अपने रब के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो।
उन्होंने कहा कि ऐसे जानवरों की ही क़ुर्बानी करें जिसकी हमें भारतीय कानून से इजाजत है जैसे बकरा-बकरी, दुंबा, भेड़ आदि। कुर्बानी में भेड़, बकरा-बकरी, दुम्बा सिर्फ एक आदमी की तरफ से एक जानवर होना चाहिए और ऊंट में सात आदमी शिरकत कर सकते हैं। कुर्बानी के लिए ऊंट पांच साल, बकरा-बकरी एक साल का होना चाहिए। कुर्बानी के दिनों में साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। अपशिष्ट पदार्थ सड़कों पर न फेंके। दीन-ए-इस्लाम में साफ-सफाई को आधा ईमान करार दिया गया है लिहाजा इसका खास ख्याल रखें। कुर्बानी को लेकर सोशल मीडिया पर मजाकिया मैसेज से सख्ती के साथ खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं।
हाफिज आफताब ने बताया कि हदीस में आया है कि पैगंबर-ए-आजम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि यौमे जिलहिज्जा यानी दसवीं जिलहिज्जा में इब्ने आदम का कोई अमल अल्लाह के नजदीक कुर्बानी करने से ज्यादा प्यारा नहीं है। ईद-उल-अजहा में हर वह आकिल, बालिग मर्द-औरत मुसलमान जो कुर्बानी के तीन दिनों के अंदर जरूरते अस्लिया को छोड़कर कर्ज से फारिग होकर तकरीबन 40 से 45 हजार रुपया का मालिक हो जाए तो उसके ऊपर कुर्बानी वाजिब है। इसी वजह से हर मुसलमान इस दिन कुर्बानी करवाता है। हदीस में है कि सहाबा किराम ने अर्ज किया या रसूलल्लाह हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम यह कुर्बानी क्या है? आपने फरमाया हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। जो इस उम्मत के लिए बरकरार रखी गई है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान की दुआ मांगी गई। दर्स में हाफिज आरिफ, मोहम्मद कासिद, मोहम्मद अरमान, जलालुद्दीन, अली हसन आदि मौजूद रहे।

Auto Fatched From DVNA