September 23, 2021

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हिफ़्जा फातिमा ने मुकम्मल किया कुरआन-ए-पाक, सजी मिलाद की महफिल

गोरखपुर-डीवीएनए। ऊंचवा निवासी मरहूम हाजी मो. अब्दुल कुद्दूस खान की 11 वर्षीय पोती हिफ्जा फातिमा ने बुधवार को हाफिज व कारी मो. अयाज की देखरेख में कुरआन-ए-पाक मुकम्मल किया। हिफ्जा कक्षा छह में पढ़ती हैं। इस खुशी के मौके पर ऊंचवा स्थित आइडियल मैरेज हाउस में महफिल-ए-मिलादुन्नबी सजी, जिसमें मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी (मुफ्ती-ए-शहर) ने कहा कि सबसे अफजल इल्म कुरआन, हदीस और दीन का इल्म है। इसके बगैर कोई मुसलमान हकीकी मुसलमान नहीं बन सकता।
मॉडर्न तालीम हासिल करने से पहले अपने बच्चों को कुुरआन पढ़ना सिखाएं, दीन की जरूरी और अहम बातें सिखाएं, रहन-सहन के आदाब, बड़ों के साथ अदबो एहतराम का सुलूक, छोटों से प्यार से पेश आना, जरूरी तहजीब और तरबियत देना जरूरी है। औलाद का हक है कि उनकी अच्छी तालीम व तरबियत का इंतजाम किया जाए।
मौलाना रियाजुद्दीन कादरी ने कहा कि रसूल-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने आज से चैदह सौ साल पहले स्पष्ट फरमा दिया कि मां-बाप की तरफ से औलाद को सबसे अफजल तोहफा उनकी अच्छी तालीम और तरबियत है। यही उनके लिए दीन और दुनिया दोनों एतबार से अच्छी नेमत है। बाकी सारी चीजें फानी हैं और सानवी दर्जा रखती हैं इसलिए अपनी औलाद को पढ़ाइए और मेहनत करके पढ़ाइए। एक वक्त भूखे रहकर पढ़ाना पड़े तो भूखे रहकर पढ़ाइए ताकि अल्लाह के पास जवाबदेही आसान हो।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गई। तमाम लोगों ने हिफ्जा को दुआओं से नवाजा। शीरीनी बांटी गई। महफिल में कारी सरफुद्दीन, हाफिज मो. अयाज अहमद, मो. शादाब अहमद, हाजी उबैद अहमद खान, अब्दुल मतीन फैजी, नासिफ अहमद, सैयद युसूफ कमाल, सैयद ओबैदुर्रहमान, हाफिज रेयाज अहमद, हाफिज नजरे आलम कादरी, मौलाना अली अहमद आदि मौजूद रहे।

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