September 23, 2021

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सहाबी-ए-रसूल हजरत साद व इमाम बुसीरी का मनाया उर्स-ए-पाक

गोरखपुर-DVNA। चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर व सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में सहाबी-ए-रसूल हजरत सैयदना साद बिन अबी वक्कास रदियल्लाहु अन्हु व श्कसीदा बुर्दा शरीफश् के रचियता हजरत इमाम सरफुद्दीन अबू अब्दुल्लाह मोहम्मद अल बुसीरी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ खवानी की गई।
चिश्तिया मस्जिद के इमाम हाफिज महमूद रजा कादरी ने कहा कि हजरत सैयदना साद मक्का में पैदा हुए। बचपन में आपको तीरंदाजी का शौक था। जवान होने के बाद आप अक्सर वक्त तीर-कमान बनाने, उसे ठीक करने में और तीरंदाजी के अभ्यास में गुजारते। आप ईमान लाने वाले पहले आठ असहाब में शामिल हैं। आपके जिन्दगी में ही रसूल-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने आपको जन्नती होने की खुशखबरी दे दी। आप जंगे बद्र, जंगे उहद, जंगे खंदक, जंगे खैबर, फतह मक्का और दीगर जंगों में शरीक हुए। हजरत साद ने मुसलमानों की तरफ से सबसे पहला तीर चलाया। आपकी दुआ अल्लाह तआला रद्द नहीं फरमाता था। तीस हिजरी में हजरत सैयदना उस्माने गनी रदियल्लाहु अन्हु के जमाने में आप चंद साथियों के साथ चीन तशरीफ ले गये और बादशाह की इजाजत से गुआंगजौ, चीन की सबसे पहली मस्जिद तामीर की और तीलामे दीन करते रहे। आपसे करीब 271 हदीस रिवायत हैं। आपका विसाल 25 जिल कादा 54 हिजरी में हुआ। मजार गुआंगजौ, चीन में है। जहां लाखों अकीदतमंद हाजरी देते हैं।
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि हजरत इमाम सरफुद्दीन अबू अब्दुल्लाह मोहम्मद अल बुसीरी ने अपने गांव में कुरआन-ए-पाक की तालीम हासिल की और हाफिज-ए-कुरआन हुए। फिर काहिरा में अरबी, लिटरेचर और तवारीख की तालीम हासिल की। तीस साल की उम्र में रसूल-ए-पाक की शान में कसीदा लिखना शुरु किया। जब आप पर फालिज का अटैक हुआ तो श्कसीदा बुर्दा शरीफश् लिखना शुरु किया। कसीदा बुर्दा रसूल-ए-पाक की बारगाह में कबूल हुआ और बहुत मशहूर हुआ। रसूल-ए-पाक ने ख्वाब में आपको अपनी मुबारक चादर अता फरमाई। जिस वजह से इसे कसीदे का नाम श्कसीदा बुर्दाश् पड़ गया। पूरी दुनिया के आशिके रसूल श्कसीदा बुर्दा शरीफश् पढ़कर दिलों की राहत हासिल करते हैं। कसीदा बुर्दा शरीफ में 160 अशआर हैं। आपका विसाल 25 जिल कादा 694 हिजरी में हुआ। मजार जेंडरिया, मिस्र में है। जहां अकीदतमंदों का तांता लगा रहता है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो शांति व तमाम बीमारियाों से शिफा की दुआ मांगी गई। उर्स-ए-पाक में शारिक अली, सैफ अली, फुजैल अली, फैजान, सज्जाद अहमद, मुख्तार अहमद, आसिफ रजा, कारी सद्दाम, हाफिज आमिर हुसैन, अजमत अली, रहमत अली, मोहम्मद फैज, मुहम्मद जैद हाफिज उमर, शाहिद अली, तारिक अली, असलम खान, आरिफ खान आदि लोग शामिल हुए।

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