July 24, 2021

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जमानत मंजूर करना जज के विवेक पर निर्भर: हाईकोर्ट

प्रयागराज-डीवीएनए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि आपराधिक मामले में जमानत नियम है तो जेल अपवाद है। जमानत मंजूर करना अपराध के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए जज के विवेक पर निर्भर करता है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने नाबालिग के साथ दुराचार कर वीडियो वायरल करने व धमकाने के आरोपी रिजवान को जमानत पर रिहा करने से इनकार करते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि दुराचार के साक्ष्य पर ट्रायल के समय विचार होगा। यह देखा जाएगा कि पीडिता के साथ उचित न्याय हो।
मंडी जिले की कोतवाली में नाबालिग बच्ची के गर्भवती होने पर घटना के पांच माह बाद 28 जनवरी 2018 को एफआईआर तब दर्ज कराई गई, जब लड़की ने अपनी मां से उसके साथ हुए दुराचार की घटना बताई। मेडिकल रिपोर्ट में बाह्य चोट न होने के आधार पर आरोपी रिजवान की ओर से कहा गया कि उसे फंसाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि लड़की का बयान और आरोपी की धमकी अपराध की गंभीरता बता रहे हैं। पांच माह बाद जांच रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों पर तय होगी। इसके के आधार पर जमानत नहीं मंजूर की जा सकती।

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