July 28, 2021

My UP News

My UP NEWS

‘विजन’ को हकीकत में बदलने की कला ‘लीडरशिप’

मुरादाबाद। टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि लीडरशिप बिहेवियर इन क्रुशल टाइम्स पर जोर देते हुए कहा, अच्छा लीडर वही है, जो विपरीत समय में भी लीडरशिप क्वालिटीज के संग-संग अपने साथियों को वैश्विक जरूरतों के मुताबिक ढाला जाए।

वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के टिमिट की ओर से लीडरशिप- चैलेंजिस, इशूज़ एंड प्रैक्टिसेज पर आयोजित 12वीं इंटरनेशनल कांफ्रेंस में बोल रहे थे। कांफ्रेंस में फिज़ी समेत जुटे देशभर के एक दर्जन नामचीन शिक्षाविदों ने शिरकत की जबकि दुबई फिज़ी समेत भारत के 40 रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत हुए। इस कांफ्रेंस के चार तकनीकी सत्र हुए। इससे पूर्व टिमिट के निदेशक प्रो. विपिन जैन ने कहा, यह कांफ्रेंस शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। कांफ्रेंस का संचालन डॉ. उत्पला दास ने किया। कांफ्रेंस के वेलेडिक्ट्री सेशन में कांफ्रेंस की प्रोसीडिंग्स का भी विमोचन हुआ। सात घंटे चली इस इंटरनेशनल कांफ्रेंस में देश-विदेश के करीब 250 प्रतिभागी शामिल हुए।

वनस्थली यूनिवर्सिटी, राजस्थान के प्रो. अनिल मेहता ने लीडरशिप क्वालिटीज एवं लीडरशिप कम्युनिकेशन स्किल्स पर सचेत करते हुए कहा, लीडर और साथियों के बीच में कभी दूरी नहीं होनी चाहिए। तालमेल पर जोर देते हुए बोले, ऐसे में लीडर की अच्छाइयों का फायदा उसके अनुयायियों को मिलेगा। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी के प्रो.अखिल मिश्रा ने इंटीग्रेटेड एंड बैलेंस इन बिहेवियर पर कहा, लीडरशिप की विशेषता यह होनी चाहिए, उसमें नेतृत्व के तमाम गुण समाहित हों। फिज़ी के नेशनल यूनिवर्सिटी के डॉ. अवनीश शुक्ला ने क्रिएटिव थिंकिंग इन लीडरशिप मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा, लीडर में तमाम आयामों पर सोचने की अद्भुत क्षमता होनी चाहिए। टीएमयू के एमिरेट्स प्रोफेसर फूलचंद जैन ने कहा, जैन साहित्य का लीडरशिप स्किल्स पर बहुत व्यापक रहा है। साथ ही जैन लीडरशिप की देश के सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में अहम भूमिका रही है। इतिहास के अनेक साक्ष्य मौजूद हैं, जिसमें हम यह देख सकते हैं कि किस प्रकार जैन साहित्य ने देश की अनेक महान विभूतियों की कार्यशैली पर असर डाला है।

फिज़ी की साउथ पेसिफिक यूनिवर्सिटी के डाॅ. केशमीर मकुन ने कलेक्टिव लीडरशिप पर जोर देते हुए कहा, आज की मौजूदा परिस्थितियों में ग्रुप लीडरशिप ही एक बेहतर समाधान है, जिसके जरिए हम कलेक्टिवली अपनी जिम्मेदारियों को समाहित करके ऑर्गेनाइजेशंस को तरक्की के रास्ते पर ले सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ पेसिफिक फिजी आईलैंड्स के डॉ. जैनेश सामी वेरियस लीडरशिप स्टाइल्स पर बोले, मौजूदा वैश्विक बाजार में एक तरह की लीडरशिप की तुलना में वेरियस लीडरशिप स्टाइल्स को अपनाना अधिक कारगर रहेगा। डॉ. निमित गुप्ता और डॉ. सुनील गुप्ता ने टेक्निकल सेशन में अपने-अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। टीएमयू के रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने क्लेरिटी इन इंस्ट्रक्शन : एज ए लीडर पर जोर देते हुए कहा, लीडर वही है- जो सीधा और स्पष्ट निर्देश दे ताकि साथी अपने काम में और दक्ष हो सकें। साथ ही उन्होंने टीम मेंबर्स को अथॉरिटी देने की पुरजोर वकालत की। टीएमयू की एसोसिएट डीन प्रो. मंजुला जैन ने एकेडमिक लीडरशिप पर जोर देते हुए कहा, एकेडमिक लीडरशिप आज के समय में कॉरपोरेट सेक्टर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रॉपर एजुकेशन से ही एक एकेडमिक लीडरशिप की दक्षता हासिल की जा सकती है। इस कांफ्रेंस का मुख्य उद्देश्य लीडरशिप स्किल्स में सुधार लाना है। कांफ्रेंस में सर्वाधिक प्रतिभागियों ने अपने रिसर्च पेपर्स में इस प्रकार के मुद्दों को ही टेक्निकल तरीके से समझाने की कोशिश की, कैसे हम अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग कार्यशैली के जरिए लीडरशिप स्किल्स को और धार दे सकें। टिमिट के निदेशक प्रोफेसर विपिन जैन ने कहा, लीडरशिप सोच को अपनी क्षमता के बूते हकीकत में बदलने की कला है। अंत में उन्होंने सभी अतिथिगण, श्रोतागण और शिक्षकगणों का शुक्रिया अदा किया। कांफ्रेंस में कांफ्रेंस कन्वीनर डॉ. अमित कंसल और कांफ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. मनोज अग्रवाल मौजूद रहे, जबकि टिमिट की ओर से डॉ. विभोर जैन, डॉ. ज्योति पुरी, डॉ. उत्पला दास और मिस अनुपमा वर्मा ने टेक्निकल सत्रों का संचालन किया। इस दौरान डॉ. मोहित रस्तोगी, श्री अमित वर्मा, श्री विवेक देवरत, मिस प्राची रस्तोगी, श्रीमती अंशु चौहान आदि की भी ऑनलाइन मौजदूगी रही।

Auto Fatched From DVNA