September 24, 2021

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अपने गुरु से मिलने को 1 महीने तक लगातार कोचिंग जाता था सेना का जवान, आखिरकार ऐसे हुई मुलाकात

पटना। बिहार के मशहूर शिक्षक आरके श्रीवास्तव ने अपने एक छात्र की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की है, जिसे सभी को पढ़ना चाहिए. आज भी ऐसे छात्र हैं जो सफलता के बाद अपने गुरु से मिलने के लिए महीनों तपस्या करते हैं। आरके श्रीवास्तव ने लिखा, मेरे प्रिय छात्र दीपक कुमार से फोन पर बातचीत हुई। राष्ट्र के प्रति उनके प्रेम की भावना को सलाम करने लायक है।

बिहार राज्य के रोहतास जिले के बिक्रमगंज के पास घोसियान कलां गांव निवासी दीपक कुमार की कहानी प्रेरणादायक है. दीपक की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सेंट्रल पब्लिक स्कूल से हुई, उसके बाद दीपक ने बिहार बोर्ड से इंटर और हाई स्कूल की परीक्षा बिक्रमगंज रोहतास से पास की. आप भी पढ़ें दीपक ने कैसे चखा सफलता का स्वाद फिलहाल दीपक भारतीय सेना में एचएवी क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं।

इससे पहले दीपक सेना में रहते हुये वर्ष 2016-17 में NDA परीक्षा पास किया पर इंटरव्यू में उसे सफलता नहीं मिल पाई। इससे पूर्व वर्ष 2013 में उसने 12वीं की परीक्षा पास किया और इसी वर्ष उसने सेना में ज्वाईन किया अभी वर्तमान में वह नासिक महाराष्ट्र में पोस्टेड है। बिहार में एक कहावत है कि पहला भोजन नहीं छोड़ना चाहिये यानी पहली सरकारी नौकरी जिस पोस्ट पर भी लगे ज्वाइन जरूर करना है और यदि देश सेवा की बात हो तो वैसे मौका कभी नहीं छोड़ना चाहिये। ग्रमीण परिवेश के स्टूडेंट्स की जब सरकारी नौकरी लगती है तो उसके परिवार और गांव में खुशी का महौल अलग होता है। वह अन्य अपने जूनियर के लिये रोल मॉडल बन जाता है, पर दीपक की बात ही कुछ अलग है वह पिछ्ले 7 वर्षों से आर्मी ( थल सेना) में नौकरी कर देश की सेवा कर रहा है और जैसा की दीपक ने बताया कि सर मैं अभी भी रात 9 से 1 बजे तक पढ़ाई करता हूं मेरे दिमाग में जो लक्ष्य है उसके लिये दिन रात परिश्रम कर रहा हूं, जल्द ही मेरा लक्ष्य पुरा होगा। यह बात सुनकर दीपक पर हमें काफी गर्व हुआ।

दीपक ने बातचीत के क्रम में बीते दिनों को याद करते हुये कहा कि कैसे सर आप पूरी रात लगातार 12 घंटे हम लोगों को पढ़ाते थे कब रात से सुबह हो जाती पता ही नहीं चलता था, उतनी मेहनत कराने वाले शिक्षक अब कहां मिलते हैं, एन्जॉय करते हुये आपके पढ़ाने का तरीका लाजवाब था। आज भी जब दोस्तों से बात होती है तो आपके रात भर गणित पढ़ाने का तरीके का जिक्र जरूर हो जाता है, आज सर मैं जो कुछ भी हूं आपके द्वारा कराये गये मेहनत की ही देन है। दीपक की बाते सुन आरके श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी स्टूडेंट्स की सफलता में उस बच्चे की मेहनत के साथ उसके माता-पिता का योगदान सर्वोपरि है उसके बाद गुरु का स्थान आता है।

दीपक के पिता का नाम राजकुमार सिंह उर्फ महाराज सिंह है जो सिचाई विभाग में कार्यरत थे। दीपक की सफलता में उसके मेहनत के साथ उसके माता पिता का दिया गया संस्कार और गुरु आरके श्रीवास्तव का बहुत बड़ा योगदान है।
दीपक ने इंटर और हाईस्कूल बिक्रमगंज से 10 वीं परीक्षा पास किया, उसके बाद AS COLLEGE बिक्रमगंज से 12 वीं और वर्ष 2013 में उसकी सरकारी नौकरी आर्मी में लगी। आपको बताते चलें कि दीपक की दो बहनें भी देश सेवा कर रही हैं। एक बहन CRPF में है तो एक बिहार पुलिस में, ग्रमीण परिवार के एक ही घर के बेटे बेटियों सभी का सरकारी नौकरी लगना समाज के लिये प्रेरणा है।

आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि दीपक मेरे शुरुआत बैच का स्टूडेंट है, जब टीबी की बिमारी के चलते ईलाज के दौरान डॉक्टर ने मुझे घर पर रहकर आराम करने का सलाह दिये थे, घर पर रहते रहते बोर होने लगा तो गांव के स्टूडेंट्स को पढ़ाना चालू किया। आज जब दीपक ने फेसबुक के माध्यम से मेरा नंबर मांगा और फिर फ़ोन पर काफी देर बातचीत हुई तो काफी खुशी हुई। दीपक ने एक ऐसी बातें बताई कि उसे सुनकर आखें नम हो गई क्योंकि आज के दिनो में ऐसे शिष्य कम ही मिलते हैं जो अपने गुरु से मिलने के लिये लगातार 1 महीने कोचिंग पर आता है पर मुलाकात नहीं हो पाती है, आज दीपक ने फ़ोन पर बातचीत के क्रम में बताया कि सर मैं नौकरी से 1 महीने की छुट्टी में कुछ वर्ष पहले अपने गांव आया था तो आपसे मिलने बिक्रमगंज कोचिंग पर गया तो पता चला की कोचिंग बंद है फिर अगले दिन भी गया फिर भी आपसे मुलाकात नहीं हो पाई, कोचिंग के नीचे जो दुकान थी उनसे मैंने आपका नंबर मांगा क्योंकि आपका पुराना नंबर लग नहीं रहा था शायद नंबर आपका बदल चूका था। दुकान वाले से आपका नया नंबर हमें प्राप्त नहीं हो पाया फिर भी मैं प्रतिदिन लगातार 1 महीने सुबह में एक बार कोचिंग पर जरूर घूम लेता था कि मेरी मेरे सर से मुलाकात हो जाये पर आपसे मुलाकात नहीं हो पाई और मेरे 1 महीने की छुट्टी बीतने के बाद मैं अपने नौकरी पर वापस आ गया था।

दीपक की यह सब बाते सुनकर आरके श्रीवास्तव भावुक हो गये क्योंकि ऐसे संस्कारी शिष्य कम ही मिलते हैं। आरके श्रीवास्तव ने बताया कि शायद उन दिनो में मैं कुछ दिनों के लिये देहरादून या अन्य किसी जगह बिहार से बाहर पढ़ाने के लिये गया था इसलिये मुलाकात नहीं हो पाई। घंटो बातचीत हुई तो दीपक ने बताया कि सर आप हम जैसे स्टूडेंट्स के लिये फरिश्ता बनकर आये थे, गांव में प्रतियोगी परीक्षाओं का माहौल बनाना और स्टूडेंट्स को सफल बनाना किसी चमत्कार से कम नहीं, बातचीत के वक्त दीपक ने कहा कैसे सर आप पूरी रातभर लगातार हमलोगों को पढ़ाते थे, कब रात से सुबह हो जाता पता ही नहीं चलता था। आज आपके द्वारा कराये गये मेहनत का ही देन है कि हम इस उपलब्धी तक पहुंचे हैं। आरके श्रीवास्तव ने कहा आप जैसे स्टूडेंट्स पर काफी गर्व होता है जो अपनी मिट्टी से आज भी जुड़े है। आप देश के उन सभी स्टूडेंटस के लिये रॉल मॉडल जो गांव में कम सुविधा में रहकर भी सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं और उस सपने को साकार करते हैं।

आरके श्रीवास्तव ने बताया कि दीपक उन लाखों स्टूडेंट्स के लिये ROLE मॉडल है जो ग्रमीण परिवेश में रहकर अपने सपने को पंख लगाना चाहते हैं। सबसे बड़ी बात दीपक ने दिल को छू लेने वाला बताई जो हर भारतीय को उससे सीख लेना चाहिये। दीपक ने बताया कि सर आपने तो नि:स्वार्थ भाव से दिन रात पढ़ाकर हमें काबिल बनाया और मैं जब सफल हुआ तो मैं भी हर संभव जरुरतमंदों की मदद करने का प्रयास करता हूं,आगे बड़े लक्ष्य जो हमने सोचा है जिसकी हम तैयारी भी कर रहे हैं उसमें सफलता पाकर समाज और देशहित में लोगों की मदद करनी है। आरके श्रीवास्तव ने कहा कि आपके माता-पिता और आप पर हम सभी को गर्व है, आपके हौसले और नेक सोच से यह सीख मिलती है कि “जीतने वाले छोड़ते नहीं , छोड़ने वाले जीतते नहीं ” दीपक ने कुछ फोटो भेजा है जो आपसे शेयर कर रहे हैं।

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