September 23, 2021

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महंगाई की मार से कराह रहे लोगों ने कहा अब नहीं चाहिए अच्छे दिन…

इंदौर (डीवीएनए)। पेट्रोल-डीजल और खाद्य तेलों के आसमान छूते दामों के बाद सब्जियों की कीमतें भी अब तेवर दिखाने लगी हैं। खेरची बाजारों में कुछ सब्जियों को छोड़ ज्यादातर सब्जियां 40 रुपए प्रति किलो से ऊपर बिकने लगी हैं। हरी मिर्ची तो पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिया खेरची भाव में 70-80 रुपए, भिंडी-गिलकी 40-50 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है।
दरअसल, पिछले लंबे समय से लॉकडाउन के दौरान बड़ी मात्रा में सब्जियों की बोवनी में भी कुछ देरी हुई है। इस वजह से वर्तमान में निमाड़ और खंडवा के आसपास से आने वाली सब्जियों की आवक लगभग सिमट गई है। इसी कारण सब्जियों के आसमान छूते दामों ने जहां आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है वहीं गृहणियों के किचन का बजट भी गड़बड़ाया है। थोक सब्जी विक्रेता राजेश-गौरव चैहान का कहना है कि मंडी में एकाएक आवक में भारी कमी आने से सब्जियां महंगी हो रही हैं। आमदिनों रोजाना 150 से ज्यादा सब्जियों की गाडियां मंडी में आती थी लेकिन इस सप्ताह से आवक घटकर 40-50 गाड़ी ही प्रतिदिन रह गई है और करीब 20-25 दिनों तक सब्जियों की आवक कम ही रहने वाली है। ऐसे में सब्जियों के दामों में आगे भी कोई बड़ी राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
सब्जी व्यवसायी गोपाल-मुकेश कुशवाह का कहना है कि महाराष्ट्र और गुजरात से भी आने वाली सब्जियों की आवक भी घट गई है। दरअसल, डीजल के दामों में हुई वृद्धि की वजह से ट्रक भाड़े काफी बढ़ गए हैं जिससे बाहर से आने वाली सब्जियों की लागत ऊंची बैठ रही हे। इस कारण कई व्यापाीर भी बाहर से सब्जियां कम ही मंगवा रहे हैं। इन दिनों महाराष्ट्र से शिमला मिर्च, गिलकी और टमाटर और राजस्थान से भिंडी और टमाटर आ रहे हैं वो भी बेहद सीमित मात्रा में। इस बारे में लोगों का कहना है कि महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। दो महीने के लंबे लॉकडाउन की वजह से घरों में जो बचत थी वो लगभग खत्म हो गई। शहर अनलॉक होते ही आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों ने किचन का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। खाद्य तेल, दालें और सब्जियां भी महंगी हो गई। अच्छे दिनों की बात करने वाले सरकार अगर ये अच्छे दिन होते हैं तो हमे नहीं चाहिए ऐसे अच्छे दिन। महंगाई के चलते आम आदमी का बजट दिनोंदिन गड़बड़ा है तथा लोग महंगाई की मार से कराह कर कह रहे हैं कि इस तरह के अच्छे दिन हमें नहीं चाहिए…

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