July 24, 2021

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हौंसले को सलाम, चाय बेचकर परिवार का पेट पाल रही ख़ुशी, बाप का साया उठा, मां है बीमार…

प्रयागराज डीवीएनए। पंखों से कुछ नहीं होता, हौंसलों से उड़ान होती है…, इस कहावत को चरितार्थ कर रही है प्रयागराज की ख़ुशी की कहानी। खेलने कूदने की उम्र में भगवान् ने पिता को छीन लिया, मां भी बीमार पड़ गयी। परिवार का पेट पालने की जिम्मेदारी ख़ुशी के कंधों पर आ गयी।

ख़ुशी ने भी हार नहीं मानी और अपनी स्टडी टेबल को ही खुले आसमान के नीचे रखा और चाय बेचनी शुरू कर दी। ख़ुशी ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही है।

प्रयागराज के शुक्ला मार्किट (हनुमान मन्दिर के सामने )सलोरी क्षेत्र मे चाय बेच रही खुशी ने मन में हजारों ख्वाब संजोए जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश लिया था।

लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था। बाप का साया सिर से उठ गया। मां की तबियत भी ख़राब हो गयी।

इन हालातों में ख़ुशी के परिवार के लिए 2 वक़्त की रोटी भी मुश्किल हो गयी। लेकिन कहते हैं ना, जब हौंसले बुलंद हो तो बड़े से बड़ा तूफान भी कुछ नहीं बिगड़ पाता। बल्कि यह हमें और मजबूत बना देता है।

अपने शैक्षिक सफर को जारी रखने तथा परिवार का पेट पालने के लिए ख़ुशी ने चाय की दुकान खोल ली। संसाधनों का अभाव था तो उसने अपने स्टडी टेबल और गैस सिलेंडर से ही खुले आसमान के नीचे दुकान की बुनियाद रख दी।

उसकी इस दुकान को खुले हुऐ कुछ ही दिन हुए हैं।
संवाद वसीम अब्बासी

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